अपने भक्तों को निराश नहीं करते संकटमोचन हनुमान

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Lord Hanuman

कहा जाता है कि मानव जाति के इतिहास में हनुमानजी से बढ़कर कोई भक्त नहीं हुआ। भगवान श्रीराम के भक्त हनुमानजी से सच्चे मन से मांगी मुराद अवश्य पूरी होती है। भगवान श्रीराम के जप व स्मरण करने वाले भक्त से हनुमानजी प्रसन्न रहते हैं और ऐसे भक्त पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।

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हनुमानजी की आराधना परम वैभव और सुख देने वाली है। शनि का प्रकोप हो तो उनकी आराधना अमोघ अस्त्र बन जाती है। हनुमानजी भगवान शंकर के ग्याहवें रूद्रावतार है। उनकी पूजा रूद्र की ही पूजा है। भगवान शंकर की ही तरह वे शीघ्र फल प्रदान करते हैं और अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।

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हनुमानजी संकटमोचन है। भगवान राम के कारज उनके ही द्वारा ही पूर्ण हुए हैं। अगस्त्य संहिता में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र में, मेष लग्न की उदयबेला में माता अंजनी के गर्भ से हनुमानजी प्रकट हुए। भगवान श्रीराम के साथ हनुमानजी का अटूट नाता है, इसलिए चैत्र शुक्ल पक्ष में भी हनुमानजी की जयंती मनाई जाती है। प्रति सप्ताह मंगल और शनि को हनुमानजी की पूजा यही दर्शाती है कि कलियुग में वहीं संकटमोचन है।

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हनुमानजी हर युग और काल में पूजनीय है। हनुमानजी की पूजा पूर्ण सावधानी से करनी चाहिए। ब्रह्मचर्य का इसमें प्रमुख स्थान है। हनुमान चालीसा का पाठ सभी लोग कर सकते है। अच्छा हो कि स्त्रियां हनुमान चालीसा का पाठ करें, अनुष्ठान नहीं। वे अनुष्ठा किसी पुरूष सदस्य से करा सकती है।

इसी तरह बजरंग बाण सुबह और रात्रि को सोते समय करने से सारे कष्ट दूर हो जाते है। शनि का प्रभाव होने पर बजरंगबाण का 11 बार पाठ और सुंदरकांड का 59 दिन का अनुष्ठान विशेष लाभदायक होता है। अनुष्ठान पूरा होने पर यज्ञ करें।

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यदि कोई रोग से पीड़ित है तो उसे नाशै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमतबीरा का जाप करना चाहिए। पांच मंगलवार को हनुमानजी का चोला चढ़ाने, बेसन के लड्डूओं का भोग लगाने से भी कष्ट दूर होते हैं।

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