Touching the feet : भारतीय संस्कृति में बड़ों का सम्मान करना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। प्राचीन काल से ही चरण स्पर्श को आदर, विनम्रता और आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम माना जाता रहा है। ऐसी मान्यता है कि दिन की शुरुआत माता-पिता, गुरुजनों और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर करने से जीवन में सकारात्मकता और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
हालांकि, धर्मशास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं में कुछ ऐसी परिस्थितियों और व्यक्तियों का भी उल्लेख मिलता है, जिनके चरण स्पर्श करने से बचने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं कि किन लोगों के पैर नहीं छूने चाहिए और इसके पीछे क्या कारण बताए गए हैं।
1. मंदिर में किसी व्यक्ति के पैर नहीं छूने चाहिए
धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदिर में भगवान सर्वोच्च माने जाते हैं। इसलिए यदि मंदिर में कोई बुजुर्ग, गुरु या सम्मानित व्यक्ति मिल जाए, तो उनके प्रति सम्मान अवश्य व्यक्त करें, लेकिन चरण स्पर्श करने से बचें। माना जाता है कि भगवान की उपस्थिति में किसी अन्य व्यक्ति के चरण स्पर्श करना उचित नहीं माना जाता।
2. सोए हुए या लेटे हुए व्यक्ति के चरण स्पर्श न करें
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सो रहे या लेटे हुए व्यक्ति के चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि आशीर्वाद तभी प्राप्त होता है जब सामने वाला व्यक्ति जागृत अवस्था में हो। इसलिए ऐसे समय में चरण स्पर्श करने से बचना चाहिए।
3. श्मशान से लौटे व्यक्ति के पैर न छुएं
धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार से लौटने के बाद व्यक्ति को स्नान आदि शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इसी कारण श्मशान से लौटे व्यक्ति के चरण स्पर्श करना वर्जित माना गया है। शुद्धि के बाद ही उनके चरण स्पर्श किए जा सकते हैं।
4. पत्नी के चरण स्पर्श करने से बचने की सलाह
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में पति-पत्नी के संबंधों को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं। इनके अनुसार पत्नी द्वारा पति के चरण स्पर्श को सम्मान का प्रतीक माना गया है, जबकि पति को पत्नी के चरण स्पर्श न करने की सलाह दी गई है। हालांकि आधुनिक समाज में इस विषय को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जाता है।
5. बेटी, पोती या नातिन से पैर नहीं छुआने चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्याओं को देवी स्वरूप माना जाता है। इसी कारण कई विद्वान मानते हैं कि पिता, दादा या परिवार के बड़े सदस्यों को बेटी, पोती, नातिन या भतीजी से अपने चरण स्पर्श नहीं करवाने चाहिए। इसे कन्या के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।
निष्कर्ष
भारतीय संस्कृति में चरण स्पर्श सम्मान और संस्कार का प्रतीक माना जाता है। वहीं कुछ धार्मिक मान्यताएं ऐसी भी हैं जो विशेष परिस्थितियों में चरण स्पर्श से बचने की सलाह देती हैं। इन मान्यताओं को आस्था और परंपरा के संदर्भ में देखा जाता है, और अलग-अलग क्षेत्रों एवं समुदायों में इनके पालन के तरीके भी भिन्न हो सकते हैं।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. News Post इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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