Jharkhand Student Protest रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। रांची में चल रहा यह आंदोलन 16 अगस्त को अपने 23वें दिन में पहुंच गया। छात्रों ने अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करने का ऐलान किया है। इसके अलावा आंदोलनकारी छात्र सरकार पर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का दबाव बना रहे हैं।
आंदोलन के बीच सरकार पहले ही 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और JPSC की 2023 तथा 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जता चुकी है। इसके बावजूद छात्रों ने आंदोलन समाप्त नहीं किया है, क्योंकि उनकी कुछ प्रमुख मांगों पर अभी सहमति नहीं बनी है। इनमें JSSC-CGL परीक्षा को लेकर मांग और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच जैसी मांगें शामिल हैं।
20 अगस्त को CM आवास घेराव का ऐलान
छात्रों ने आंदोलन के अगले बड़े चरण के तौर पर 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आधिकारिक आवास का घेराव करने की घोषणा की है। आंदोलनकारी छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी सामने आई है। 15 अगस्त को छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली थी और इसी दौरान आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई।
छात्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि अब केवल परीक्षाओं को रद्द करना पर्याप्त नहीं है। वे कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने और भर्ती परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने किन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई?
लगातार विरोध और बातचीत के बाद झारखंड सरकार ने तीन JPSC परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है। इनमें:
- 14वीं JPSC Combined Civil Services Preliminary Examination
- JPSC Backlog Examination 2023
- JPSC Backlog Examination 2025
शामिल हैं। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक समिति बनाने और कुछ मामलों में तेज कार्रवाई के लिए उपायों की बात भी कही है।
हालांकि, JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की छात्रों की मांग स्वीकार नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि इस परीक्षा से जुड़े परिणाम और नियुक्तियां अदालत के निर्देशों के तहत आगे बढ़ी थीं। यही मुद्दा छात्रों और सरकार के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
तीन JPSC सदस्यों के इस्तीफे से भी बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आ चुका है। JPSC के तीन सदस्यों अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हंसदा और जमाल अहमद ने इस्तीफा दे दिया था। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी था।
तीन सदस्यों के इस्तीफे ने परीक्षा व्यवस्था और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, इस्तीफे को अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आखिर छात्र क्यों कर रहे हैं आंदोलन?
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने परीक्षा रद्द करने, जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई है।
पिछले दिनों छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की CBI जांच, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और एक बेहतर परीक्षा व्यवस्था जैसी मांगें शामिल रही हैं।
हालांकि सरकार ने कुछ मांगों पर कदम उठाए हैं, लेकिन छात्रों का कहना है कि उनकी सभी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुई हैं। इसी वजह से आंदोलन खत्म होने के बजाय लगातार आगे बढ़ रहा है।
आंदोलन के दौरान पुलिस से भी हुआ था टकराव
झारखंड छात्र आंदोलन के दौरान 10 अगस्त को रांची में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी। प्रदर्शनकारियों के विधानसभा की ओर बढ़ने के दौरान बैरिकेडिंग तोड़ने और झड़प की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई।
इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। इस घटना ने आंदोलन को और राजनीतिक रूप दे दिया और छात्रों की मांगों को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई।
हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा है कि युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
सरकार की ओर से बातचीत और सुधार के कदमों के बावजूद छात्र आंदोलन जारी रखे हुए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 अगस्त को प्रस्तावित CM आवास घेराव के बाद सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल झारखंड का छात्र आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। सरकार ने तीन JPSC परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही है। दूसरी ओर छात्र अभी भी अपनी बाकी मांगों पर सरकार से स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव इस आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव होगा। इससे पहले प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था, सरकार की रणनीति और छात्र संगठनों के अगले कदम पर नजर रहेगी।
इस पूरे विवाद का असर केवल मौजूदा अभ्यर्थियों पर नहीं, बल्कि भविष्य में झारखंड में होने वाली सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है। इसलिए अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल आंदोलन को शांत करना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षा प्रणाली में ऐसा भरोसा कायम करना है जिससे अभ्यर्थियों को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया का विश्वास मिल सके।
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